बिहार: बंदी मां-बेटी के यौन उत्पीड़न में फंसे जेल अधीक्षक,

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मुजफ्फरपुर के शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारा के अधीक्षक राजीव कुमार सिंह पर एक महिला बंदी ने खुद व बेटी के यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया है। उसने जेल से ही प्रधानमंत्री कार्यालय व राष्ट्रीय महिला आयोग को इसकी सूचना पत्र के माध्यम से दी है। पत्र पर उसने 28 मार्च को हस्ताक्षर किया है। महिला के पत्र पर संज्ञान लेते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय ने जांच के आदेश दिए हैं। डीएम आलोक रंजन घोष ने जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित की है। टीम को एक सप्ताह में बिंदुवार रिपोर्ट देने को कहा गया है। .

मुजफ्फरपुर की रहने वाली महिला बंदी ने अपने पत्र में कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। उसने बताया है कि वह अपनी बेटी के साथ जेल में बंद है। जेल की महिला सिपाही उसकी बेटी को जेल अधीक्षक के कमरे में जाने को विवश करती है। इंकार पर उनके साथ मारपीट की जाती है और भागलपुर जेल स्थानांतरित करने की चेतावनी दी जाती है। आरोप लगाया कि बीते चार मार्च को बेटी ने बात नहीं मानी तो मां की पिटाई इस हद तक की गई कि वह बेहोश हो गई।

आरोप बेबुनियाद: जेलर

मुजफ्फरपुर केंद्रीय कारा के जेलर एसके मौर्य ने कहा है कि जिस महिला ने आरोप लगाया है, वह जेल से छूट चुकी है। उसका पति भी जेल में बंद था और बेटी भी। सभी देह व्यापार के आरोप में गिरफ्तार हुए थे। जेल परिसर व वार्ड 24 घंटे कैमरे की नजर में हैं। सभी आरोप झूठे व बेबुनियाद हैं। हम जांच का सामना करेंगे।.

देह व्यापार में गई थी जेल

जेल के रिकार्ड के मुताबिक, उक्त महिला बंदी (40) व उसकी बेटी (25) देह व्यापार के आरोप में जेल गई थी। उसके पति को भी इसी आरोप में दिसम्बर में जेल भेजा गया था। महिला बीते वर्ष सितम्बर में जेल गई थी। वह जेल से इस साल मार्च के अंत में छूटी है। उसकी बेटी भी अप्रैल में छूटी है। पति भी पिछले माह ही छूटा है।

जेल आईजी मिथिलेश मिश्र के अनुसार, मुजफ्फरपुर जेल अधीक्षक के खिलाफ शिकायत की एक प्रति जेल प्रशासन को मिली है। जेल प्रशासन ने इसके मद्देनजर जेल अधीक्षक के खिलाफ जांच के लिए डीएम को पत्र लिखा है।

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