कंप्यूटर शिक्षा के क्षेत्र में अजीत सिंह का अभूतपूर्व योगदान : बिहार सरकार द्वारा सम्मानित किया गया

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अजीत सिंह

अजीत सिंह ग्राम- रामोंवरिया, जिला-बक्सर के रहने वाले हैं और वह स्वर्गीय सीताराम सिंह जी के पुत्र हैें। इन्होंने अपनी पुस्तकों का लिखना अपने बड़े भाई अभियंता रणवीर सिंह से प्रेरित होकर शुरू किया।

अजीत कुमार सिंह ने विगत 20 वर्षों से पटना विश्वविद्यालय के अग्रणी महाविद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षा के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं। वर्तमान मे वे पटना वूमेंस कॉलेज में सहायक प्रोफेसर के रूप में विगत 10 वर्षों से कार्यरत हैं और आज उनके पढ़ाए हुए विद्यार्थी देश विदेश में उच्च पदों पर पदासीन होते हुए अपना और बिहार का नाम रोशन कर रहे हैं।अपने 20 वर्षों के कार्यकाल के दौरान उन्होंने यह महसूस किया कि जो छात्र ग्रामीण परिवार से संबंध रखते हैं उन्हें न सिर्फ विदेशी लेखकों के द्वारा लिखी हुई महंगी किताबों को खरीदने में परेशानी होती है बल्कि कठिन अंग्रेजी को भी समझने में की दिक्कत होती है।

इसी विचार पर काम करते हुए उन्होंने ऐसे कंप्यूटर की किताबों को लिखा है और बाजार में लाने का निश्चय किया है जो बिल्कुल सरल और स्पष्ट भाषा में हो तथा जिसकी कीमत भी बिल्कुल कम हो ताकि गरीब विद्यार्थी भी उन्हें खरीद सकें। फिलहाल उनकी लिखी 12 किताबों अमेजॉन के द्वारा प्रकाशित की गई है और विकय के लिए उपलब्ध है। कंप्यूटर विज्ञान के पुस्तकों के बाजार में अपनी खुद की लिखी कोर जावा, ऑपरेटिंग सिस्टम, क्लाउड कंप्यूटिंग, पैरेलल कंप्यूटिंग, यूनिक्स, वेब टेक्नोलॉजी, डिस्ट्रीब्यूटेड कंप्यूटिंग, डाटा स्ट्रक्चर एंड एल्गोरिथम, साइबर लॉ इन इंडिया, ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग विद सी प्लस प्लस, और डीबीएमएस जैसी पुस्तकों को गूगल प्ले स्टोर पर पुस्तकों को उपलब्ध करवाया हैे इनकी एक पुस्तक खुले बाजार में एसडी पब्लिकेशन से प्रकाशित एवं बिक्री के लिए उपलब्ध है।

इन्होंने अपनी एक पुस्तक डिसटीब्युटेड कंप्यूटिंग को प्रोफेसर डॉक्टर रुपाश्री सिंह, (विभागाध्यक्ष, बायोलॉजिकल साइंस, सुकूटो स्टेट यूनिवर्सिटी, नाइजीरिया) के साथ लिखी हैे इन्होंने एक और पुस्तक पैरालल कंप्यूटिंग प्रोफेसर डॉक्टर बाल गंगाधर प्रसाद (विभागाध्यक्ष, गणित विभाग, पटना विश्वविद्यालय) के साथ भी लिखी हैे इन्होंने अपनी पुस्तक कोर जावा डॉ भावना सिन्हा (विभागाध्यक्ष, एमसीए विभाग, पटना वूमंस कॉलेज) के साथ भी लिखी है। अजीत सिंह कहते हैं की ‘इन सारी किताबों को लिखने के पीछे इनका उद्देश्य सरल एवं स्पष्ट भाषा तथा आर्थिक रूप से सस्ती किताबों को कंप्यूटर विज्ञान के छात्रों के बीच उपलब्ध करवाना है ताकि उन छात्रों को अपने विषय की स्पष्ट ज्ञान प्राप्त हो सके।’ हालांकि श्री सिंह का कहना है कि ‘भारत के विभिन्न महाविद्यालयों के पाठ्यक्रम एवं एआईसीटीई के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखते हुए कंप्यूटर की किताबों की पूरी श्रृंखला को उपलब्ध करवाएंगे जो बहुत कम कीमत में विद्यार्थियों को मिल जाएंगे।

शिक्षा के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान को देखते हुए इस वर्ष (2018) उन्हें शिक्षक दिवस पर बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री द्वारा सम्मानित भी किया गया है। इनकी आने वाली पुस्तकें ‘पाइथन लैंग्वेज’ एवं ‘क्लाउड कंप्यूटिंग’ के ऊपर आधारित हैे इनकी सारी पुस्तकें बीटेक एमटेक एवं एमसीए कोर्स की है जो एआईसीटीई के सिलेबस के अनुरूप हैे उन्होंने अपनी सारी पुस्तकें पिछले 20 वर्षों के कंप्यूटर विज्ञान के शिक्षण अनुभव के आधार पर लिखी हैे का कहना है की मुझे एक बिहारी होने पर आज गर्व हैे। एक बार अल्बर्ट आइंस्टीन कहा, अगर आप इसे आसानी से समझा नहीं सकते हैं, तो आप इसे पर्याप्त रूप से समझ नहीं सकते हैं। इस कहानियों को सच मानते हुए, बार-बार यह देखा गया है कि छात्रों को अक्सर उनके सामने पेश की गई अवधारणा को समझना कठिन होता है यदि यह अवधारणा विदेशी मानसिकता वाले लोगों के लिए विदेशी भाषा में लिखा गया हो। इस कमी को दूर करने के लिए और चीजों को आसान बनाने के लिए अजीत सिंह, पटना वुमन कॉलेज के सहायक प्रोफेसर ने बी-टेक / एम-टेक / एमसीए के छात्रों के लिए अपनी किताबें लिखने का फैसला किया जो कि दृश्य शैली, विषय उन्मुख, अच्छी तरह से बाजार-शोध में न केवल सरल बल्कि अच्छी तरह से प्रस्तुत की गई है ।

इनकी किताबें कंप्यूटर विज्ञान के क्षेत्र में 20 वर्षों का शिक्षण अनुभव के साथ एवं आर्थिक रूप से किफायती भी है।
बिहार के लिए गर्व की बात है की एक बिहारी लेखक ने कंप्यूटर साइंस की इतनी सारी एकेडमिक बुक लिखी है जो हमारे विकासशील बिहार की एक मिसाल हैे। अजीत सिंह ने कहा कि ‘मुझे एक बिहारी होने पर आज गर्व है।’

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