जन्म और मृत्यु से अवकाश है “मोक्ष”- संतोष आर्य

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कई जन्मों के शुभ कर्मों के द्वारा हमें मोक्ष की प्राप्ति होती है।

संवाददाता महंथ रामजीवन दास बरौनी

बेगूसराय अभेदानंद आश्रम ,आर्य समाज मंदिर बारो में देवयज्ञ के पश्चात मोक्ष प्राप्ति के साधन पर परिचर्चा का आयोजन किया गया संगठन मंत्री संतोष आर्य ने बताया प्रत्येक जीव जब जन्म लेते हैं तो उसे पूर्व जन्म में किए हुए कर्मों के अनुसार दुख एवं सुख की प्राप्ति होती है । प्रत्येक जीव चाहती है कि उसे दुख से छुटकारा मिले । कई जन्मों के शुभ कर्म के द्वारा जन्म – मृत्यु के चक्र से 31 नील 10 खरब 40 अरब वर्ष के लिए मुक्ति मिलती है । मोक्ष सदा के लिए नहीं होता, उसे फिर जन्म लेना पड़ता है। मोक्ष का अर्थ है दुखों से छूटकर सुख को प्राप्त होना और ब्रह्म में रहना । यह मुक्ति परमेश्वर की आज्ञा पालने, अधर्म ,अविद्या ,कुसंग ,कुसंस्कार, बुरे व्यसनों से अलग रहने और सत्यभाषण, परोपकार, विद्या, पक्षपात रहित न्याय ,धर्म की वृद्धि करने , परमेश्वर की स्तुति प्रार्थना और उपासना अर्थात योगाभ्यास करने विद्या पढ़ने पढ़ाने और धर्म से पुरुषार्थ कर ज्ञान की उन्नति करने इत्यादि उत्तम साधनों से होती है।
अचार्य अरुण प्रकाश आर्य ने कहा मुक्तवस्था में जीव अत्यंत व्यापक ब्रह्म में स्वच्छन्द घूमता,शुद्ध ज्ञान से सब सृष्टि को देखता ,अन्य मुक्तों के साथ मिलता तथा सृष्टि विद्या को क्रम से देखता हुआ सब लोग लोकान्तरों में, अर्थात जितने भी लोक प्रत्यक्ष दीखते हैं तथा जो नहीं दिखते उन सब में घूमता है जिस जीवात्मा का जितना ज्ञान अधिक होता है मुक्त अवस्था में उसका उतना ही आनंद भी अधिक आता । इस अवसर पर रामदेव आर्य, रविंद्र नाथ आर्य ,ओम प्रकाश आर्य ,आचार्य राघवेंद्र आर्य, कैलाश आर्य, रामप्रवेश आर्य, भूदेव आर्य, सुधीर आर्य ,चंद्र शेखर आर्य, अग्निवेश, सुशांत, रामेश्वर आर्य, इत्यादि से उपस्थित थे

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