छठ दुनिया का सर्वश्रेष्ठ व्रत संकल्प में होती है निष्ठा और पूरी ईमानदारी : महापर्व

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chhath-puja KHARNA_PRASAD

सोमवार को पर्व के दूसरे दिन सुबह में व्रती गंगा सहित विभिन्न नदियों व तालाबों में स्नान कर पवित्र पात्र में जल भरकर घर आए तथा प्रसाद बनाया। जो व्रती नदी किनारे या तालाब किनारे छठ करेंगी वे वहीं मिट्टी के चूल्हे में प्रसाद बनाने में जुटीं दिखीं। इसके बाद देर शाम खरना की पूजा के बाद 36 घंटे का निर्जला उपवास आरंभ हो गया। अब आज शाम में भगवान भास्‍कर को पहला अर्घ्‍य दिया जाएगा

समर्पण: न मंदिर की जरूरत न मंत्र की छठ व्रत में न कोई मंदिर की जरूरत न मंत्र की, न जाप की न ही किसी कर्मकांड की। जरूरत है तो बस पूर्ण समर्पण की। यह एकमात्र व्रत है जिसमें 36 घंटे निर्जला रहना पड़ता है।

प्रकृति: महापर्व में सबसे बड़ा महत्व स्वच्छता का महापर्व में किसी चीज का महत्व है तो वह है-स्वच्छता का। पर्यावरण का, प्रकृति का। इसीलिए इस व्रत में हर कुछ वही इस्तेमाल होता है जो प्रकृति के द्वारा छठ के समय उपलब्ध होता है।

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