मोदी के न्यू इंडिया में तड़पते किसान बिलखते मजदूर- ज़ीशान नैयर

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2022 तक वो किसानों की आमदनी दोगुना करेगी लेकिन साढ़े 4 साल में ऐसा कुछ होता दिख नही रहा है

भारत कृषि प्रधान देश है हमलोगों ने बचपन से अब तक पढ़ा और सुना है जो हक़ीक़त भी है! कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार रहा है और अब भी है।जिस देश में 57% आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पे निर्भर हो उस देश में किसानों का किया हाल है वो जग ज़ाहिर है क्योंकि उनके साथ ना मीडिया है ना सरकार और ना ही सरकारी बाबू तो सवाल है ऐसे में वो जाये तो जाये कहाँ? डॉ का बेटा डॉ बनना चाहता है इंजीनियर का बेटा इंजीनियर बनना चाहता है लेकिन किसान का बेटा किसान नही बनना चाहता है! सरकार कहती है 2022 तक वो किसानों की आमदनी दोगुना करेगी लेकिन साढ़े 4 साल में ऐसा कुछ होता दिख नही रहा है! पिछले दिनों उत्तराखंड से किसान क्रांति पद यात्रा निकली सैंकड़ों किलोमीटर का का फासला तय करके दिल्ली तक उनको जाना था उससे पहले ही उनको पुलिस और सेना के द्वारा रोका गया,झड़पें भी हुई और कई किसान घायल भी हुए वो भी ऐसे दिन जिस दिन अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस पर हिंसा की तस्वीर अपने आप में किसानों दुर्दशा बयां करती है!इत्तेफ़ाक़ से 2 अक्टूबर पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का भी जन्मदिवस होता है उन्होंने सितम्बर 1965 को पाकिस्तान से मिली युद्ध में विजय के बाद दिल्ली के इतिहासिक रामलीला मैदान में राष्ट्र को संबोधित करते हुए रेडियो पे ये नारा दिया था “जय जवान जय किसान” का नारा दिया था लेकिन मौजूदा सरकार ने सेना और जवान को आमने सामने खड़ा कर दिया तो मोदी राज़ में ना जय जवान रहें और ना जय किसान हाँ जय अंबानी जय अडानी जय मालिया जरूर रहा है, क्योंकि मौजूदा दौर में सरकार ने बोलने की आज़ादी छीन ली है याद होगा खाने की शिक़ायत को लेकर सेना में तेज बहादुर सिंह को निकाल दिया गया! ग़रीब मजदूर किसान अगर बैंक से लोन ले और उसको वापस ना करे तो दुनिया छोड़ देतें और बड़े लोग देश छोड़ देते हैं मालिया नीरव मेहुल चौकसी उदहारण है! इसमें सरकार के बिना मिली भगत के देश छोड़ना संभव है?निगम का तीन लाख करोड़ कर्जा माफ किया गया है किसानों का 10 पैसा इसी को सबका साथ सबका विकास कहा जाता है प्रधानमंत्री मोदी के भाषा में 2014 के चुनाव में किसानों के लिए बीजेपी का एक नारा था “बहुत हुआ किसानों पे अत्याचार अब की बार मोदी सरकार” जो 2018 आते आते बदल सा गया बहुत हुआ किसानों पे अत्याचार गोली मारेंगे अबकी बार” भारत की पहचान अंबानी अडानी से नही अन्नदाता किसान से है! मोदी सरकार ने किसानों से किया वादा निभाया? कृषि राज्य मंत्री राफेल पे प्रेस कॉन्फ्रेंस करके ब्यान दे रहें हैं उस दिन पता चला कृषि राज्य मंत्री का नाम ये हैं! तकरीबन डेढ़ साल पहले तमिलनाडु के किसान दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन के लिए जुटे थे.नरमुंड के साथ चूहे खाने और पेशाब पीने पे मजबूर थे वो तस्वीरें आज भी विचलित करती है! इसके बाद मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में हुई पुलिस फायरिंग के दौरान पांच किसानों की मौत हो गई थी. मार्च 2018 में करीब सात राज्यों के 35 हजार किसान 180 किमी की लंबी पदयात्रा के बाद अपनी मांगों के साथ मुंबई पहुंचे थे.क्योंकि भारत गांवों में बसता है और बीजेपी को शहरी लोगों की पार्टी मानी जाती है, किसान गाँवों बसते हैं किसान बीजेपी से नाराज़ है इस लिहाज़ से 2019 चुनावी साल काफ़ी दिलचस्प हो जाता है’ किसान के नाम पे सरकार बनती है सब्सिडी के नाम पे कम्पनी मुनाफ़ा कमाती है और किसान हर दिन ग़रीब होता चला जा रहा है! शायद आज सरकार को अंबानी के लिए नही किसानों के बारे में सोंचना चाहिए!

Zeeshan Naiyer
Student -Mass Communication And Journalism
Maulana Azad National Urdu University Hyderabad
Contact- 9709976589
Email – zeeshanaiyer22@gmail.com
Facebook.com/Zeeshan.jesu
Twitter – @zeeshan_media

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