गजब की प्रतिभा: महज 14 साल का है आनंद, याद है पूरी गीता, कहीं से पूछ लीजिए

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पुरोहित दादा को बचपन में गीता पढ़कर सुनाते-सुनाई पूरी हो गई कंठस्थ, आनंद की शुरुआती शिक्षा गांव के स्कूल में हुई।

सीतामढ़ी। उम्र महज 14 साल, मगर पूरी गीता याद। कहीं से भी कोई श्लोक सुना देता। यह प्रतिभाशाली बालक है, सीतामढ़ी के बेलसंड प्रखंड के भटौलिया निवासी मनोज झा का पुत्र आनंद झा। आठवीं कक्षा में पढऩे वाले आनंद की प्रतिभा देख गीता जयंती पर काशी हिंदू विवि में आयोजित समारोह में कुलपति ने सम्मानित किया। आनंद की शुरुआती शिक्षा गांव के स्कूल में हुई। अभी वह मुजफ्फरपुर के एक हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहा है।

पिता मुजफ्फरपुर में ही निजी ट्रांसपोर्ट कंपनी में काम करते हैं। उसके दादा पुरोहित का काम करते हैं। गांव के मंदिर में पुजारी हैं। घर में रामायण और गीता के अलावा धार्मिक और कर्मकांड की बहुत सी पुस्तकें हैं। इसी के चलते बचपन से ही उसकी रुचि धार्मिक पुस्तकों के प्रति रही। वह प्रतिदिन अपने दादा प्रेमानंद झा को गीता पढ़कर सुनाता था। कुछ ही दिनों में उसे गीता कंठस्थ हो गई। इसकी जानकारी जब काशी हिंदू विवि तक पहुंची तो कुलपति ने आनंद को बुलावा भेजा।

वहीं उसकी परीक्षा ली। सफल होने पर 18 दिसंबर को गीता जयंती पर पुरस्कृत किया। गीता की पुस्तक और प्रमाणपत्र दिया। दादा प्रेमानंद झा बताते हैं कि हर इंसान को गीता का ज्ञान होना चाहिए। वर्तमान में लोगों का धार्मिक पुस्तकों से लगाव कम हो रहा है। हिंदू के प्राध्यापक डॉ. आनंद प्रकाश वर्मा बताते हैं कि गीता का अध्ययन हर किसी के लिए जरूरी है।

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