आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्किल्स में भारत का दबदबा : जाने भारत का ताज़ा रेंकिंग

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AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अगर परिभाषित किया जाए तो हम यह कह सकते हैं कि ह्यूमन इंटेलिजेंस को मशीन के इंटेलिजेंस में बदलना। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से मशीनों में इंसानों वाली समझ विकसित हो रही है। पिछले कुछ सालों में कई कंपनियों खासतौर पर गूगल और माइक्रोसॉफ्ट ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में कई काम शुरू किए हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कम्प्यूटिंग पावर को बढ़ाया जा रहा है।

इस क्षेत्र में अमेरिका और चीन के बाद भारत का नंबर आता है। भारत के बाद इजरायल और जर्मनी का नंबर आता है। प्रोफेशनल नेटवर्किंग साइट LinkedIn की रिपोर्ट के मुताबिक, इन सभी देशों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कार्यक्षेत्रों में हो रहा है। इस सोमवार को रिलीज किए हुए डाटा के मुताबिक इन देशों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करने वाले प्रोफेशनल्स में जबरदस्त बढ़ोत्तरी हुई है।

भारत में 2015 के मुकाबले 2017 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मेंबर्स की संख्या में 190 फीसद की वृद्धि देखी गई है।कई लोग यह भी मानते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वजह से बेरोजगारी बढ़ सकती है। कुछ दिन पहले ही संयुक्त राष्ट्र ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बेरोजगारी का खतरा नहीं है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के विशेषज्ञ एकहार्ड अर्न्स्ट ने कहा, ‘मामला नौकरी के अवसर खत्म होने से ज्यादा काम के स्वरूप में बदलाव का है। AI एल्गोरिदम की वजह से ऐसे काम आसानी से हो सकेंगे, जो एक ही ढर्रे पर लगातार होते हैं और जिनमें बहुत समय लग जाता है। मनुष्य पारस्परिक संबंधों, सामाजिक कार्यों और भावनात्मक गुणों को निखारने पर काम कर सकेंगे। विकासशील देशों में इसका सबसे बड़ा फायदा कृषि क्षेत्र को होगा।

भारत इस समय दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है। इसके साथ ही तकनीक के क्षेत्र में भी भारत दुनिया के टॉप देशों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। केन्द्र सरकार की नीति आयोग भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर जोर दे रही है। जिसमें हेल्थकेयर, कृषि, शिक्षा, स्मार्ट सिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर फोकस किया जा रहा है।

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