जानिए आखिर क्यों सुहागिन महिलाएं रखती हैं करवा चौथ का व्रत

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सुहागिनों ने मनाया करवा चौथ,किया चांद का दीदार

(टिंकु कुमार एडिटर)

पति की लम्बी उम्र आयु की कामना को लेकर सुहागिन महिलाओं के द्वारा शनिवार को करवा चौथ पर्व मनाया गया । पर्व को लेकर महिलाओं में उत्साह चरम पर थी । महिलाओं ने पूरी नियम निष्ठा के साथ कठिन तपस्या माने जाने वाली इस पर्व को कर अपने सुहाग की लम्बी उम्र की कामना की । महिलाओं ने पर्व के निमित भगवान शिव, मैया पार्वती समेत भगवान गणेश की पूजा अर्चना कर पति समेत समस्त पारिवारिक जनों की जीवन मंगल की कामना की ।

में पति की मंगल कामना को लेकर सुहागिन महिलाओं ने करवाचौथ का व्रत रखा । कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष तिथि पर रंग बिरंगी तथा आकर्षक परिधानो में सजी संवरी महिलाओ ने संध्या काल में झुण्ड में बैठकर करवा चौथ की कथा सुनी और रात्रि में चाँद दर्शन के बाद पति के हाथों पानी पीने के उपरान्त अपना व्रत तोड़ी। करवाचौथ को लेकर सुहागिनों में उत्साह परवान पर था । पर्व के दिन भक्तिमय वातावरण बना रहा । शाम को स्त्रियां पूजा करके चंद्रमा को अर्ध्य देकर अपने पति की पूजा की और उनके हाथ से पानी पीकर व्रत तोड़ी । व्रत को लेकर महिलाओ ने संध्या में करवा चौथ व्रत की कथा सुनी और चाँद के दर्शन के बाद अपने पति का चेहरा देखकर व्रत को तोड़ी। वर्षो से करवा चौथ व्रत कर रही महिलाये जहाँ हर्षित थी वही, जिनका पहला करवाचौथ व्रत था वे सबसे ज्यादा हर्षित थी

पंडित ने कहा कि सुहागनों के लिए सभी व्रत और त्योहार खास होते हैं।लेकिन करवा चौथ का व्रत सबसे खास होता है। ये व्रत महिलाएं अपनी पति की लंबी उम्र की कामना के लिए रखती हैं। नवविवाहित औरतों के लिए ये व्रत काफी अहम होता है।

बताया जाता है की करवा चौथ कई रूप में मनाया जाता है। इसे करक, करवा, करूआ या करूवा अनेक नामों से जाना जाता है।करवा मिट्टी या धातु से बने हुए लौटे के आकर के एक पात्र को कहते हैं, जिसमें टोंटी लगी होती है। करवा चौथ का व्रत स्त्रियां अपने सुखमय दाम्पत्य जीवन के लिए रखती हैं। शास्त्रों में दो विशिष्ट संदर्भों की वजह से करवा चौथ व्रत के पुरातन स्वरूप का प्रमाण मिलता है। इस व्रत के साथ शिव-पार्वती के उल्लेख की वजह से इसके अनादिकाल का पता चलता है। इस पर्व को महिलाएँ करती है।निर्जला एकादशी व्रत की तरह यह व्रत भी निराहार व निर्जला होता है। सौभाग्यवती महिलाएं चंद्रदर्शन के पश्चात व्रत तोड़ती हैं और कन्याएं आसमान में पहले तारे के दर्शन के बाद व्रत समाप्त करती हैं। संभव है कि लोकोक्ति ‘पहला तारा मैंने देखा, मेरी मर्जी पूरी’ इस व्रत के कारण ही शुरू हुई हो।

करवा चौथ व्रत के संदर्भ में व्रती खुशबू कुमारी ने कहा कि इस पर्व में शिव, पार्वती, कार्तिकेय और चंद्रमा की पूजा की जाती है। इस व्रत के लिए चंद्रोदय के समय चतुर्थी होना जरूरी माना गया है।इस व्रत में करवे का विशेष रूप से प्रयोग होता है। महिलाएं दिनभर निर्जला उपवास रखती हैं और चंद्रोदय के बाद भोजन-जल ग्रहण करती है।

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