रेलवे का गजब कारनामा: बिहार के रास्‍ते नेपाल जा रही गुड्स ट्रेन के दो डिब्बे गायब

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कल्पना कीजिए, ट्रेन चले और रास्ते से दो डिब्बे गायब हो जाएं तो...? लेकिन यही सच है। ऐसा हो गया है। गुड्स ट्रेन बिहार के रास्‍ते नेपाल जा रही थी। पढ़ें खबर में पूरा मामला क्‍या है।

पूर्वी चंपारण। कल्पना कीजिए, ट्रेन चले और रास्ते से दो डिब्बे गायब हो जाएं तो…? लेकिन यही सच है। ऐसा हो गया है। विशाखापतनम से नेपाल वाया बिहार के लिए मालगाड़ी (गुड्स ट्रेन) चली तो ठीक, लेकिन रास्ते से ही उसके दो डिब्बे गायब हो गए हैं। अब उन दोनों डिब्बों को लेकर रेलवे कितना सजग है, यह तो वही जाने। लेकिन उन डिब्बों में जिस बिजनेसमैन का यूरिया (खाद) लदा था, वह काफी परेशान हैं और पिछले छह माह से रेलवे के इस आॅफिस से उस आॅफिस भटक रहे हैं।

चक्‍कर लगाते-लगाते बिजनेसमैन परेशान
विशाखापत्तनम से नेपाल के सिरिसिया स्थित ड्राइपोर्ट के लिए चली यूरिया लदी मालगाड़ी की 42 में से दो वैगन रास्ते में ही गायब हो गए। पीडि़त बिजनेसमैन रेलवे के सीनियर अफसरों से शिकायत करते-करते थक चुके हैं। उन्‍होंने एग्रीकल्चर इनपुट कंपनी लिमिटेड, नेपाल ने भारत से यूरिया आयात किया था। इस आयातित खाद को पहुंचाने की जिम्मेदारी किसान ट्रेडर्स, मोतिहारी के पास थी।

प्रोपराइटर ने लिखा पत्र
इसके प्रोपराइटर शिवपूजन गुप्ता ने रेलवे के सीनियर अफसरों को पत्र लिख बताया है कि यूरिया की 42 वैगन की मालगाड़ी की रैक उन्होंने बुक कराई थी। छह सितंबर को विशाखापत्तनम से मालगाड़ी नेपाल के लिए चली। उसे रक्सौल के रास्ते नेपाल के परसा जिले के सिरिसिया स्थित ड्राइपोर्ट पर पहुंचना था। 11 सितंबर को मालगाड़ी रक्सौल पहुंची तो 40 वैगन ही थे। दो का पता नहीं था। इसकी जानकारी उन्होंने तत्काल संबंधित अधिकारी को दी। एक वैगन में 1170 और दूसरे में 1230 यानी कुल 2400 बोरा खाद था। इसकी कीमत करीब 24 लाख बताई जा रही है।

क्षतिपूर्ति के लिए किया जा सकता आवेदन
रक्सौल रेलवे माल गोदाम के अधीक्षक अजय कुमार ने बताया कि विशेष परिस्थिति में ट्रैक या वैगन में तकनीकी खराबी के कारण देरी होती है। आशंका है कि दोनों वैगन तकनीकी खराबी के कारण किसी स्टेशन पर रुके हों। गायब वैगन की जानकारी नेपाल के सरकारी महकमे और ट्रांसपोर्ट के उच्चाधिकारियों को दी गई है। माल नहीं मिलने पर रेलवे के मुख्य दावा अधिकारी, हाजीपुर को क्षतिपूर्ति के लिए आवेदन दिया जा सकता है।भारत-नेपाल के बिजनेस पर पड़ सकता असर

शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने से परेशान बिजनेसमैन का कहना है कि यदि बुक वैगन में से दो नहीं चले तो इसकी सूचना पहले क्यों नहीं दी गई? इसका प्रभाव भारत-नेपाल के व्यापार पर पड़ सकता है। इस संबंध में रक्‍सौल स्थित सीमा शुल्क के संयुक्त आयुक्त संतोष कुमार कहते हैं कि भारत या अन्य देशों से आयातित सामान की नियमित जांच के बाद ही नेपाल भेजने की अनुमति दी जाती है। यूरिया संबंधी कागजात की जांच की गई थी। 42 वैगन के कागजात व्यापारी ने दिए थे। लेकिन, 40 वैगन ही थे। इस संबंध में जांच और आवश्यक कागजी कार्रवाई के बाद मालगाड़ी के इन वैगन को नेपाल जाने की अनुमति दी गई थी।

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